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mahabharat 6.92.16: जब महाबली राक्षस घटोत्कच ने उस बाण को, जो इन्द्र के वज्र के समान चमक रहा था, अपनी ओर आते देखा, तो उसने अपनी शीघ्रता के कारण स्वयं को उससे बचा लिया।   |   mahabharat अध्याय 6.92: घटोत्कचका दुर्योधन एवं द्रोण आदि प्रमुख वीरोंके साथ भयंकर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 92: घटोत्कचका दुर्योधन एवं द्रोण आदि प्रमुख वीरोंके साथ भयंकर युद्ध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.92.16 
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य बाणमिन्द्राशनिप्रभम्।
लाघवान्मोचयामास महात्मा वै घटोत्कच:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जब महाबली राक्षस घटोत्कच ने उस बाण को, जो इन्द्र के वज्र के समान चमक रहा था, अपनी ओर आते देखा, तो उसने अपनी शीघ्रता के कारण स्वयं को उससे बचा लिया।
 
When the great demon Ghatotkacha saw that arrow, which shone like Indra's thunderbolt, coming towards him, he saved himself from it by virtue of his swiftness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)