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mahabharat 6.91.3-4h: हे मनुष्यों के स्वामी! उस राक्षस की गर्जना से समुद्र, आकाश, पर्वत और वन सहित सम्पूर्ण पृथ्वी जोर-जोर से काँपने लगी। आकाश, दिशाएँ और समस्त कोणों के क्षेत्र भी काँपने लगे।   |   mahabharat अध्याय 6.91: घटोत्कच और दुर्योधनका भयानक युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 91: घटोत्कच और दुर्योधनका भयानक युद्ध  »  श्लोक 3-4h
 
 
श्लोक  6.91.3-4h 
नदतस्तस्य शब्देन पृथिवी सागराम्बरा।
सपर्वतवना राजंश्चचाल सुभृशं तदा॥ ३॥
अन्तरिक्षं दिशश्चैव सर्वाश्च प्रदिशस्तथा।
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! उस राक्षस की गर्जना से समुद्र, आकाश, पर्वत और वन सहित सम्पूर्ण पृथ्वी जोर-जोर से काँपने लगी। आकाश, दिशाएँ और समस्त कोणों के क्षेत्र भी काँपने लगे।
 
O Lord of men! Due to the roar of that demon, the entire earth including the sea, sky, mountains and forests started shaking violently. The space, directions and regions of all the angles also started trembling. 3 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)