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mahabharat 6.91.17-18: महाराज! जब हाथी सवार इस प्रकार पराजित और नष्ट हो गए, तब दुर्योधन ने क्रोध में आकर प्राणों की आसक्ति त्यागकर उन राक्षसों पर आक्रमण कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.91: घटोत्कच और दुर्योधनका भयानक युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 91: घटोत्कच और दुर्योधनका भयानक युद्ध  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  6.91.17-18 
तेषु प्रक्षीयमाणेषु भग्नेषु गजयोधिषु॥ १७॥
दुर्योधनो महाराज राक्षसान् समुपाद्रवत्।
अमर्षवशमापन्नस्त्यक्त्वा जीवितमात्मन:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जब हाथी सवार इस प्रकार पराजित और नष्ट हो गए, तब दुर्योधन ने क्रोध में आकर प्राणों की आसक्ति त्यागकर उन राक्षसों पर आक्रमण कर दिया।
 
Maharaj! After the elephant riders were thus defeated and destroyed, Duryodhana, overcome by anger, abandoning his attachment for life, attacked those demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)