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mahabharat 6.91.14-16h: वे नाना प्रकार से गर्जना करते हुए बिजली से चमकते हुए बादलों के समान प्रतीत हो रहे थे। बाण, शक्ति, ऋष्टि, नाराच, भिन्दिपाल, शूल, मुदगर, कुल्हाड़ियों, पर्वत शिखरों और वृक्षों का उपयोग करके वे गजरोहियों तथा विशाल गजों का संहार करने लगे। 14-15 1/2   |   mahabharat अध्याय 6.91: घटोत्कच और दुर्योधनका भयानक युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 91: घटोत्कच और दुर्योधनका भयानक युद्ध  »  श्लोक 14-16h
 
 
श्लोक  6.91.14-16h 
नदन्तो विविधान् नादान् मेघा इव सविद्युत:॥ १४॥
शरशक्त्यृष्टिनाराचैर्निघ्नन्तो गजयोधिन:।
भिन्दिपालैस्तथा शूलैर्मुद्‍गरै: सपरश्वधै:॥ १५॥
पर्वताग्रैश्च वृक्षैश्च निजघ्नुस्ते महागजान्।
 
 
अनुवाद
वे नाना प्रकार से गर्जना करते हुए बिजली से चमकते हुए बादलों के समान प्रतीत हो रहे थे। बाण, शक्ति, ऋष्टि, नाराच, भिन्दिपाल, शूल, मुदगर, कुल्हाड़ियों, पर्वत शिखरों और वृक्षों का उपयोग करके वे गजरोहियों तथा विशाल गजों का संहार करने लगे। 14-15 1/2
 
They roared in all kinds of ways and looked like clouds with lightning. Using arrows, Shakti, Rishti, Narach, Bhindipal, Shool, Mudgar, axes, mountain peaks and trees, they started killing Gajarohis and huge Gajas. 14-15 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)