श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 91: घटोत्कच और दुर्योधनका भयानक युद्ध  » 
 
 
अध्याय 91: घटोत्कच और दुर्योधनका भयानक युद्ध
 
श्लोक 1:  धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! इरावान को युद्ध में मारा गया देखकर कुन्तीपुत्रों के महारथियों ने क्या किया? यह बताओ।
 
श्लोक 2:  संजय ने कहा- राजन! इरावान को युद्धस्थल में मारा गया देखकर भीमसेन का पुत्र राक्षस घटोत्कच जोर-जोर से चिल्लाने लगा॥2॥
 
श्लोक 3-4h:  हे मनुष्यों के स्वामी! उस राक्षस की गर्जना से समुद्र, आकाश, पर्वत और वन सहित सम्पूर्ण पृथ्वी जोर-जोर से काँपने लगी। आकाश, दिशाएँ और समस्त कोणों के क्षेत्र भी काँपने लगे।
 
श्लोक 4-5h:  भरत! घटोत्कच की महान गर्जना सुनकर आपके सैनिकों की जांघें अकड़ गईं, उनके शरीर कांपने लगे और उनके सम्पूर्ण अंगों से पसीना बहने लगा।
 
श्लोक 5-6h:  महाराज! आपके सभी सैनिक सब ओर से घबराकर सिंह से डरे हुए हाथियों के समान भयंकर हाव-भाव करने लगे।
 
श्लोक 6-8h:  वह दैत्य वज्र की गड़गड़ाहट के समान भयंकर गर्जना करता हुआ, काल, अन्तक और यम के समान क्रोध में भरा हुआ, भयंकर रूप धारण करके, हाथ में प्रज्वलित त्रिशूल लेकर, नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित बड़े-बड़े दैत्यों के साथ आया और आपकी सेना का संहार करने लगा।
 
श्लोक 8-9h:  क्रोध में भरे हुए उस भयंकर रूप वाले राक्षस को अपने ऊपर आक्रमण करते देख उसकी सेना उसके भय से युद्ध से लगभग विमुख होकर भाग गई ॥8 1/2॥
 
श्लोक 9-10h:  तब राजा दुर्योधन ने अपना विशाल धनुष उठाकर सिंह के समान बारंबार गर्जना करते हुए घटोत्कच पर आक्रमण किया।
 
श्लोक 10-11h:  बंगाल का राजा स्वयं दस हजार हाथियों की सेना लेकर उसके पीछे गया, जो पर्वतों के समान विशाल थी और जिसमें से मादक नदियाँ बह रही थीं।
 
श्लोक 11-12h:  महाराज! आपके पुत्र दुर्योधन को हाथियों की सेना से घिरा हुआ देखकर वह राक्षस क्रोधित हो गया।
 
श्लोक 12-13h:  राजेन्द्र! फिर दुर्योधन की सेना और राक्षसों के बीच भयंकर और रोमांचकारी युद्ध शुरू हो गया।
 
श्लोक 13-14h:  हाथियों की सेना को मेघों के समान अपने को घेरे हुए देखकर क्रोधित राक्षस हाथ में हथियार लेकर उनकी ओर दौड़े।
 
श्लोक 14-16h:  वे नाना प्रकार से गर्जना करते हुए बिजली से चमकते हुए बादलों के समान प्रतीत हो रहे थे। बाण, शक्ति, ऋष्टि, नाराच, भिन्दिपाल, शूल, मुदगर, कुल्हाड़ियों, पर्वत शिखरों और वृक्षों का उपयोग करके वे गजरोहियों तथा विशाल गजों का संहार करने लगे। 14-15 1/2
 
श्लोक 16-17h:  महाराज! हमने देखा कि हाथियों को रात्रिचरों ने मार डाला। उनके माथे फाड़ दिए गए, उनके शरीर से खून बह गया और उनके कई अंग टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए।
 
श्लोक 17-18:  महाराज! जब हाथी सवार इस प्रकार पराजित और नष्ट हो गए, तब दुर्योधन ने क्रोध में आकर प्राणों की आसक्ति त्यागकर उन राक्षसों पर आक्रमण कर दिया।
 
श्लोक 19:  हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले राजा! महाधनुर्धर दुर्योधन ने तीखे बाणों से राक्षसों पर आक्रमण करके उनमें से प्रधान राक्षस को मार डाला।
 
श्लोक 20-21h:  भरतश्रेष्ठ! आपके पराक्रमी पुत्र दुर्योधन ने क्रोध में भरकर चार बाणों से वैग, महारौद्र, विद्युजिह्व और प्रमाथी नामक चार राक्षसों को मार डाला। 20 1/2॥
 
श्लोक 21-22h:  तत्पश्चात् अपार आत्मबल से युक्त भरतश्रेष्ठ दुर्योधन उस रात्रि सेना पर भयंकर बाणों की वर्षा करने लगा। 21 1/2॥
 
श्लोक 22-23h:  आर्य! आपके पुत्र का वह महान् कार्य देखकर भीमसेन का महाबली पुत्र घटोत्कच क्रोध से जल उठा।
 
श्लोक 23-24h:  इन्द्र के वज्र के समान तेजस्वी विशाल धनुष खींचकर उसने बड़े वेग से शत्रु दुर्योधन पर आक्रमण किया।
 
श्लोक 24-25h:  महाराज! घटोत्कच को काल के समान आते देखकर भी आपके पुत्र दुर्योधन को तनिक भी चिन्ता नहीं हुई।
 
श्लोक 25-30h:  तत्पश्चात् क्रूर घटोत्कच ने क्रोध से लाल-लाल नेत्रों से दुर्योधन से कहा - 'हे दुष्ट! आज मैं अपने पिता और माता का ऋण चुकाऊँगा, जिन्हें तूने दीर्घकाल तक वन में रहने को विवश किया था। तू बड़ा क्रूर है। दुष्ट राजा! तूने छल से पाण्डवों को जुए में पराजित किया और तूने द्रुपद पुत्री कृष्णा को, जो केवल एक वस्त्र धारण किये हुए थी, रजस्वला अवस्था में भरी सभा में ले जाकर उसे अनेक प्रकार के कष्ट दिये तथा दुष्ट सिन्धुराज ने, जो तुझे प्रसन्न करना चाहता था, मेरे पिताओं की उपेक्षा करके आश्रम में रहने वाली द्रौपदी का अपहरण कर लिया, हे अधम! यदि तू युद्ध छोड़कर भाग नहीं गया, तो आज मैं इन अपमानों का तथा अन्य समस्त अत्याचारों का बदला अवश्य लूँगा।'
 
श्लोक 30-31:  ऐसा कहकर हिडिम्बापुत्र ने अपने होठ दांतों से काटते हुए तथा जीभ से मुंह के कोनों को चाटते हुए अपना विशाल धनुष खींचा और दुर्योधन पर बाणों की भारी वर्षा की, जैसे वर्षा ऋतु में बादल पर्वत शिखरों पर जल की धाराएं बरसाते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)