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mahabharat 6.90.89-90: द्रोणाचार्य का पराक्रम देखकर पाण्डव भय से भर गये। महाराज! युद्धस्थल में द्रोणाचार्य से क्षुब्ध होकर वे कहने लगे कि 'एकमात्र द्रोणाचार्य ही युद्धस्थल में समस्त सैनिकों का संहार करने की शक्ति रखते हैं। फिर जब वे संसार के परम विख्यात पराक्रमी योद्धाओं के समूहों से घिरे हुए हों, तब उनकी विजय के विषय में क्या कहा जा सकता है?'॥ 89-90॥   |   mahabharat अध्याय 6.90: इरावान‍्के द्वारा शकुनिके भाइयोंका तथा राक्षस अलम्बुषके द्वारा इरावान‍्का वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.90.89-90 
दृष्ट्वा द्रोणस्य विक्रान्तं पाण्डवान् भयमाविशत्।
एक एव रणे शक्तो निहन्तुं सर्वसैनिकान्॥ ८९॥
किं पुन: पृथिवीशूरैर्योधव्रातै: समावृत:।
इत्यब्रुवन् महाराज रणे द्रोणेन पीडिता:॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य का पराक्रम देखकर पाण्डव भय से भर गये। महाराज! युद्धस्थल में द्रोणाचार्य से क्षुब्ध होकर वे कहने लगे कि 'एकमात्र द्रोणाचार्य ही युद्धस्थल में समस्त सैनिकों का संहार करने की शक्ति रखते हैं। फिर जब वे संसार के परम विख्यात पराक्रमी योद्धाओं के समूहों से घिरे हुए हों, तब उनकी विजय के विषय में क्या कहा जा सकता है?'॥ 89-90॥
 
Seeing the valour of Dronacharya, the Pandavas were filled with fear. Maharaj! Being annoyed with Dronacharya on the battlefield, they started saying that 'Only Dronacharya alone has the power to kill all the soldiers on the battlefield. Then when he is surrounded by groups of the world's most renowned valiant warriors, then what can be said about his victory?'॥ 89-90॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)