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mahabharat 6.90.72-73h: युद्ध में कभी पीठ न दिखाने वाला इरावान जब क्रोध में युद्ध कर रहा था, उसी समय उसके मातृकुल से सर्पों का समुदाय उसकी सहायता के लिए वहाँ आ पहुँचा।   |   mahabharat अध्याय 6.90: इरावान‍्के द्वारा शकुनिके भाइयोंका तथा राक्षस अलम्बुषके द्वारा इरावान‍्का वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.90.72-73h 
तस्य क्रोधाभिभूतस्य समरेष्वनिवर्तिन:॥ ७२॥
योऽन्वयो मातृकस्तस्य स एनमभिपेदिवान्।
 
 
अनुवाद
युद्ध में कभी पीठ न दिखाने वाला इरावान जब क्रोध में युद्ध कर रहा था, उसी समय उसके मातृकुल से सर्पों का समुदाय उसकी सहायता के लिए वहाँ आ पहुँचा।
 
When Iravan, who never turned his back in the battle, was fighting in anger, at that very time the community of serpents from his maternal clan arrived there to help him. 72 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)