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mahabharat 6.90.68-70: बार-बार फरसे के वार से राक्षस के शरीर से बहुत अधिक रक्त बहने लगा। इससे क्षुब्ध होकर दैत्य ऋष्यश्रृंग का बलवान पुत्र अलम्बुष युद्धभूमि में अत्यंत क्रोध और प्रचण्डता प्रदर्शित करने लगा। अपने शत्रु को युद्धभूमि में प्रबल होते देख उसने अत्यंत भयंकर और विशाल रूप धारण कर लिया और अर्जुन के वीर एवं यशस्वी पुत्र इरावान को पकड़ने का प्रयत्न करने लगा।   |   mahabharat अध्याय 6.90: इरावान‍्के द्वारा शकुनिके भाइयोंका तथा राक्षस अलम्बुषके द्वारा इरावान‍्का वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 90: इरावान‍्के द्वारा शकुनिके भाइयोंका तथा राक्षस अलम्बुषके द्वारा इरावान‍्का वध  »  श्लोक 68-70
 
 
श्लोक  6.90.68-70 
परश्वधक्षतं रक्ष: सुस्राव बहु शोणितम्॥ ६८॥
ततश्चुक्रोध बलवांश्चक्रे वेगं च संयुगे।
आर्ष्यशृङ्गिस्तथा दृष्ट्वा समरे शत्रुमूर्जितम्॥ ६९॥
कृत्वा घोरं महद् रूपं ग्रहीतुमुपचक्रमे।
अर्जुनस्य सुतं वीरमिरावन्तं यशस्विनम्॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
बार-बार फरसे के वार से राक्षस के शरीर से बहुत अधिक रक्त बहने लगा। इससे क्षुब्ध होकर दैत्य ऋष्यश्रृंग का बलवान पुत्र अलम्बुष युद्धभूमि में अत्यंत क्रोध और प्रचण्डता प्रदर्शित करने लगा। अपने शत्रु को युद्धभूमि में प्रबल होते देख उसने अत्यंत भयंकर और विशाल रूप धारण कर लिया और अर्जुन के वीर एवं यशस्वी पुत्र इरावान को पकड़ने का प्रयत्न करने लगा।
 
Due to repeated piercing by the axe, a lot of blood flowed from the demon's body. Due to this, Alambusha, the strong son of the demon Rishya Shringa, displayed extreme anger and ferocity in the battlefield. Seeing his enemy becoming stronger in the battlefield, he assumed a very fierce and huge form and started trying to capture Arjuna's brave and famous son Iravan. 68-70॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)