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mahabharat 6.90.66-67h: इस प्रकार राक्षस का जो भी अंग कट जाता, वह पुनः उग आता। इरावान भी अत्यन्त क्रोधित हो गया और उस महाबली राक्षस को तीक्ष्ण कुल्हाड़ी से बार-बार काटने लगा।   |   mahabharat अध्याय 6.90: इरावान‍्के द्वारा शकुनिके भाइयोंका तथा राक्षस अलम्बुषके द्वारा इरावान‍्का वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 90: इरावान‍्के द्वारा शकुनिके भाइयोंका तथा राक्षस अलम्बुषके द्वारा इरावान‍्का वध  »  श्लोक 66-67h
 
 
श्लोक  6.90.66-67h 
एवं तद् राक्षसस्याङ्गं छिन्नं छिन्नं बभूव ह।
इरावानपि संक्रुद्धो राक्षसं तं महाबलम्॥ ६६॥
परश्वधेन तीक्ष्णेन चिच्छेद च पुन: पुन:।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार राक्षस का जो भी अंग कट जाता, वह पुनः उग आता। इरावान भी अत्यन्त क्रोधित हो गया और उस महाबली राक्षस को तीक्ष्ण कुल्हाड़ी से बार-बार काटने लगा।
 
In this manner, whatever body part of the demon was cut, it grew again from scratch. Iravan also became very angry and started cutting that mighty demon again and again with a sharp axe. 66 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)