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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 90: इरावान‍्के द्वारा शकुनिके भाइयोंका तथा राक्षस अलम्बुषके द्वारा इरावान‍्का वध  »  श्लोक 12-14
 
 
श्लोक  6.90.12-14 
सोऽभिगम्य महाबाहु: पितरं सत्यविक्रम:।
अभ्यवादयदव्यग्रो विनयेन कृताञ्जलि:॥ १२॥
न्यवेदयत चात्मानमर्जुनस्य महात्मन:।
इरावानस्मि भद्रं ते पुत्रश्चाहं तव प्रभो॥ १३॥
मातु: समागमो यश्च तत् सर्वं प्रत्यवेदयत्।
तच्च सर्वं यथावृत्तमनुसस्मार पाण्डव:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वह सत्यवादी, महाबाहु योद्धा अपने पिता के पास पहुँचा और उन्हें शांतिपूर्वक प्रणाम करके हाथ जोड़कर विनयपूर्वक अपना परिचय देते हुए महाबली अर्जुन से बोला - 'भगवन्! आप कुशल से हों। मैं आपका पुत्र इरावान हूँ।' उसने अर्जुन के साथ अपनी माता के साथ घटित हुई सारी घटना कह सुनाई। पाण्डुनंदन अर्जुन को वह सम्पूर्ण कथा ठीक-ठीक याद थी। 12-14॥
 
That truthful, mighty-armed warrior reached his father and bowed to him peacefully and with folded hands politely introduced himself to the great Arjun and said - 'Lord! May you be well. I am your son Iravan.' He narrated all the events that Arjun had with his mother. Pandanu Nandan Arjun remembered that entire story accurately. 12-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)