Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.9.76: नरश्रेष्ठ! यदि जगत् के वास्तविक स्वरूप का पूर्ण ज्ञान हो जाए, तो परमात्मा से अभिन्न होने के कारण वह स्वयं ही जीवों के लिए पिता, भाई, पुत्र, पुण्य लोक और स्वर्ग बन जाता है ॥76॥   |   mahabharat अध्याय 6.9: भारतवर्षकी नदियों, देशों तथा जनपदोंके नाम और भूमिका महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 9: भारतवर्षकी नदियों, देशों तथा जनपदोंके नाम और भूमिका महत्त्व  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  6.9.76 
पिता भ्राता च पुत्राश्च खं द्यौश्च नरपुङ्गव।
भूमिर्भवति भूतानां सम्यगच्छिद्रदर्शना॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
नरश्रेष्ठ! यदि जगत् के वास्तविक स्वरूप का पूर्ण ज्ञान हो जाए, तो परमात्मा से अभिन्न होने के कारण वह स्वयं ही जीवों के लिए पिता, भाई, पुत्र, पुण्य लोक और स्वर्ग बन जाता है ॥76॥
 
Narashrestha! If one has complete knowledge of the true nature of the universe, then due to being inseparable from the Supreme Soul, it itself becomes a father, brother, son, heavenly world of virtue and heaven for the living beings. 76॥
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि जम्बूखण्डविनिर्माणपर्वणि भारतीयनदीदेशादिनामकथने नवमोऽध्याय:॥ ९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत जम्बूखण्डविनिर्माणपर्वमें भारतकी नदियों और देश आदिके नामका वर्णनविषयक नवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)