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mahabharat 6.9.12: राजन! इनके चारों ओर हजारों अन्य अज्ञात पर्वत हैं, जो मणियों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं से भरे हुए हैं, विस्तृत हैं और विचित्र शिखरों से सुशोभित हैं॥12॥   |   mahabharat अध्याय 6.9: भारतवर्षकी नदियों, देशों तथा जनपदोंके नाम और भूमिका महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 9: भारतवर्षकी नदियों, देशों तथा जनपदोंके नाम और भूमिका महत्त्व  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.9.12 
तेषां सहस्रशो राजन् पर्वतास्ते समीपत:।
अविज्ञाता: सारवन्तो विपुलाश्चित्रसानव:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
राजन! इनके चारों ओर हजारों अन्य अज्ञात पर्वत हैं, जो मणियों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं से भरे हुए हैं, विस्तृत हैं और विचित्र शिखरों से सुशोभित हैं॥12॥
 
King! Around these there are thousands of other unknown mountains, which are filled with precious stones and other valuable things, are wide and decorated with strange peaks. ॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)