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mahabharat 6.89.6-8: मूर्ख दुर्योधन ने पहले मेरी बातों पर ध्यान नहीं दिया था। पितामह! मैंने, भीष्म, विदुर और गांधारी ने भी मूर्ख दुर्योधन के कल्याण की इच्छा से उसे सदैव ऐसा करने से रोकने का प्रयत्न किया था, किन्तु आसक्ति के कारण वह हमारी बातें नहीं समझता था। अब उसे उसका फल प्राप्त हो गया है, जिसके कारण भीमसेन प्रतिदिन युद्धभूमि में मेरे मूर्ख पुत्रों को यमलोक भेज रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.89: कौरव-पाण्डव-सेनाका घमासान युद्ध और भयानक जनसंहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 89: कौरव-पाण्डव-सेनाका घमासान युद्ध और भयानक जनसंहार  »  श्लोक 6-8
 
 
श्लोक  6.89.6-8 
न हि दुर्योधनो मन्द: पुरा प्रोक्तमबुध्यत।
वार्यमाणो मया तात भीष्मेण विदुरेण च॥ ६॥
गान्धार्या चैव दुर्मेधा: सततं हितकाम्यया।
नाबुध्यत पुरा मोहात् तस्य प्राप्तमिदं फलम्॥ ७॥
यद् भीमसेन: समरे पुत्रान् मम विचेतस:।
अहन्यहनि संक्रुद्धो नयते यमसादनम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
मूर्ख दुर्योधन ने पहले मेरी बातों पर ध्यान नहीं दिया था। पितामह! मैंने, भीष्म, विदुर और गांधारी ने भी मूर्ख दुर्योधन के कल्याण की इच्छा से उसे सदैव ऐसा करने से रोकने का प्रयत्न किया था, किन्तु आसक्ति के कारण वह हमारी बातें नहीं समझता था। अब उसे उसका फल प्राप्त हो गया है, जिसके कारण भीमसेन प्रतिदिन युद्धभूमि में मेरे मूर्ख पुत्रों को यमलोक भेज रहे हैं।
 
Foolish Duryodhan did not pay heed to my words earlier. Father! I, Bhishma, Vidura and Gandhari too had always tried to dissuade the foolish Duryodhan from doing so with the desire of his welfare, but due to attachment he did not understand our words. Now he has received the result of that, due to which Bhimasena is sending my foolish sons to Yamaloka every day in the battlefield. 6-8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)