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mahabharat 6.89.36-38: हे राजन! टूटे हुए रथों, कटी हुई ध्वजाओं, टुकड़े-टुकड़े हुए विशाल अस्त्र-शस्त्रों, पंखों, थालियों, अत्यन्त चमकते हुए छत्रों, स्वर्ण के हारों, बाजूबंदों, कुण्डलों से विभूषित सिरों, गिरे हुए सिर के आभूषणों (पगड़ियों आदि), ध्वजाओं, सुन्दर अलंकरणों, लालटेनों और लगामों आदि से आच्छादित वह युद्धभूमि ऐसी प्रतीत हो रही थी, मानो वसन्त ऋतु में उस पर नाना प्रकार के फूल गिरे हों।   |   mahabharat अध्याय 6.89: कौरव-पाण्डव-सेनाका घमासान युद्ध और भयानक जनसंहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 89: कौरव-पाण्डव-सेनाका घमासान युद्ध और भयानक जनसंहार  »  श्लोक 36-38
 
 
श्लोक  6.89.36-38 
रथैर्भग्नैर्ध्वजैश्छिन्नैर्निकृत्तैश्च महायुधै:।
चामरैर्व्यजनैश्चैव छत्रैश्च सुमहाप्रभै:॥ ३६॥
हारैर्निष्कै: सकेयूरै: शिरोभिश्च सकुण्डलै:।
उष्णीषैरपविद्धैश्च पताकाभिश्च सर्वश:॥ ३७॥
अनुकर्षै: शुभै राजन् योक्त्रैश्चैव सरश्मिभि:।
संकीर्णा वसुधा भाति वसन्ते कुसुमैरिव॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! टूटे हुए रथों, कटी हुई ध्वजाओं, टुकड़े-टुकड़े हुए विशाल अस्त्र-शस्त्रों, पंखों, थालियों, अत्यन्त चमकते हुए छत्रों, स्वर्ण के हारों, बाजूबंदों, कुण्डलों से विभूषित सिरों, गिरे हुए सिर के आभूषणों (पगड़ियों आदि), ध्वजाओं, सुन्दर अलंकरणों, लालटेनों और लगामों आदि से आच्छादित वह युद्धभूमि ऐसी प्रतीत हो रही थी, मानो वसन्त ऋतु में उस पर नाना प्रकार के फूल गिरे हों।
 
O King! That battle-field, covered with broken chariots, cut flags, huge weapons that were torn to pieces, fans, dishes, extremely shining umbrellas, golden necklaces, armlets, heads adorned with earrings, fallen head-ornaments (turbans etc.), flags, beautiful decorations,* lanterns and reins etc., looked as if various kinds of flowers had fallen on it in the spring season.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)