श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 88: भीष्मका पराक्रम, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके आठ पुत्रोंका वध तथा दुर्योधन और भीष्मकी युद्धविषयक बातचीत  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.88.27 
महोदरं महेष्वासं नाराचेन स्तनान्तरे।
विव्याध समरे राजन् स हतो न्यपतद् भुवि॥ २७॥
 
 
अनुवाद
राजा! तत्पश्चात् उसने महाधनुर्धर महोदर की छाती पर धनुष-बाण से प्रहार किया और वह युद्धभूमि में भूमि पर गिर पड़ा।
 
King! Thereafter he struck the great archer Mahodar on his chest with a bow and arrow. He fell to the ground in the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)