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mahabharat 6.88.18-19: महाराज! आदित्यकेतु ने सत्तर, बह्वाशी ने पाँच, कुण्डधर ने नब्बे, विशालाक्ष ने पाँच और अपराजित ने महाबली भीमसेन पर अनेक बाण चलाकर उसे परास्त कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.88: भीष्मका पराक्रम, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके आठ पुत्रोंका वध तथा दुर्योधन और भीष्मकी युद्धविषयक बातचीत   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.88.18-19 
आदित्यकेतु: सप्तत्या बह्वाशी चापि पञ्चभि:।
नवत्या कुण्डधारश्च विशालाक्षश्च पञ्चभि:॥ १८॥
अपराजितो महाराज पराजिष्णुर्महारथम्।
शरैर्बहुभिरानर्च्छद् भीमसेनं महाबलम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आदित्यकेतु ने सत्तर, बह्वाशी ने पाँच, कुण्डधर ने नब्बे, विशालाक्ष ने पाँच और अपराजित ने महाबली भीमसेन पर अनेक बाण चलाकर उसे परास्त कर दिया।
 
Maharaj! Adityaketu shot seventy arrows, Bahvaashi shot five, Kunddhar shot ninety, Vishalaksha shot five and Aparajit shot many arrows at the mighty warrior Bhimasena to defeat him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)