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mahabharat 6.88.15-16: आदित्यकेतु, बहवशी, कुन्धधर, महोदर, अपराजित, पण्डितक और परम दुर्जेय वीर विशालाक्ष - ये सात शत्रुमुर्दन भाई विचित्र वेशभूषा धारण करके, विचित्र कवच और ध्वजाएँ धारण करके युद्ध की इच्छा से युद्धभूमि में पाण्डुपुत्र भीमसेन पर टूट पड़े। 15-16॥   |   mahabharat अध्याय 6.88: भीष्मका पराक्रम, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके आठ पुत्रोंका वध तथा दुर्योधन और भीष्मकी युद्धविषयक बातचीत   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 88: भीष्मका पराक्रम, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके आठ पुत्रोंका वध तथा दुर्योधन और भीष्मकी युद्धविषयक बातचीत  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  6.88.15-16 
आदित्यकेतुर्बह्वाशी कुण्डधारो महोदर:।
अपराजित: पण्डितको विशालाक्ष: सुदुर्जय:॥ १५॥
पाण्डवं चित्रसंनाहा विचित्रकवचध्वजा:।
अभ्यद्रवन्त संग्रामे योद्‍धुकामारिमर्दना:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
आदित्यकेतु, बहवशी, कुन्धधर, महोदर, अपराजित, पण्डितक और परम दुर्जेय वीर विशालाक्ष - ये सात शत्रुमुर्दन भाई विचित्र वेशभूषा धारण करके, विचित्र कवच और ध्वजाएँ धारण करके युद्ध की इच्छा से युद्धभूमि में पाण्डुपुत्र भीमसेन पर टूट पड़े। 15-16॥
 
Aditya Ketu, Bahvashi, Kundhadhar, Mahodar, Aparajit, Panditaka and the most formidable brave Vishalaksh - these seven Shatramurdan brothers, dressed in strange costumes, wearing strange armor and flags, attacked Pandu's son Bhimsen in the battlefield, desirous of war. 15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)