श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 88: भीष्मका पराक्रम, भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके आठ पुत्रोंका वध तथा दुर्योधन और भीष्मकी युद्धविषयक बातचीत  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.88.1 
संजय उवाच
भीष्मं तु समरे क्रुद्धं प्रतपन्तं समन्तत:।
न शेकु: पाण्डवा द्रष्टुं तपन्तमिव भास्करम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा - राजन ! जिस प्रकार प्रज्वलित सूर्य को देखना कठिन है, उसी प्रकार जब भीष्म उस युद्ध में कुपित होकर सर्वत्र अपना पराक्रम दिखाने लगे, उस समय पाण्डव सैनिक उनकी ओर देख नहीं पा रहे थे॥1॥
 
Sanjaya said - King! Just as it is difficult to look at the blazing Sun, similarly when Bhishma became enraged in that war and started displaying his might everywhere, at that time the Pandava soldiers were not able to look at him.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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