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mahabharat 6.87.36: बाघ के पंजों और बाणों से लड़ते हुए वीर पैदल सैनिक एक दूसरे पर आक्रमण करते हुए विचित्र रूप में दिखाई दे रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.87: आठवें दिन व्यूहबद्ध कौरव-पाण्डव-सेनाओंकी रणयात्रा और उनका परस्पर घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.87.36 
पादाताश्चाप्यदृश्यन्त निघ्नन्तोऽथ परस्परम्।
चित्ररूपधरा: शूरा नखरप्रासयोधिन:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
बाघ के पंजों और बाणों से लड़ते हुए वीर पैदल सैनिक एक दूसरे पर आक्रमण करते हुए विचित्र रूप में दिखाई दे रहे थे।
 
The valiant infantry, fighting with tiger claws and arrows, appeared strange in their appearance as they attacked one another.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)