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श्लोक 6.87.34  |
दन्तिनां युध्यमानानां संघर्षात् पावकोऽभवत्।
दन्तेषु भरतश्रेष्ठ सधूम: सर्वतोदिशम्॥ ३४॥ |
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| अनुवाद |
| हे भरतश्रेष्ठ! सभी दिशाओं में लड़ने वाले हाथियों के दाँत आपस में टकराने लगे और उनसे धुएँ सहित अग्नि प्रकट होने लगी। |
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| O best of the Bharatas! The tusks of the elephants fighting in all directions clashed with each other and fire along with smoke appeared from them. |
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