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mahabharat 6.87.31-32h: हे मनुष्यों के स्वामी! दोनों ओर की सेनाएँ युद्धभूमि में एक-दूसरे से युद्ध कर रही थीं। उस समय वे देवताओं और दानवों की सेना के समान प्रतीत हो रही थीं, जो एक-दूसरे से युद्ध करने के लिए तत्पर थीं।   |   mahabharat अध्याय 6.87: आठवें दिन व्यूहबद्ध कौरव-पाण्डव-सेनाओंकी रणयात्रा और उनका परस्पर घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.87.31-32h 
तेऽन्योन्यं समरे सेने युध्यमाने नराधिप॥ ३१॥
अशोभेतां यथा देवदैत्यसेने समुद्यते।
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! दोनों ओर की सेनाएँ युद्धभूमि में एक-दूसरे से युद्ध कर रही थीं। उस समय वे देवताओं और दानवों की सेना के समान प्रतीत हो रही थीं, जो एक-दूसरे से युद्ध करने के लिए तत्पर थीं।
 
O Lord of men! The armies of both sides were fighting each other on the battlefield. At that time, they looked like the army of gods and demons, ready to fight each other. 31 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)