Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.87.30-31h: भरत! आकाश के समान निर्मल तलवारें और सौ चन्द्रमाओं से सुसज्जित बैल की खाल से बनी अनोखी ढालें ​​दिखाई दे रही थीं। हे राजन! वे सभी तलवारें और ढालें ​​युद्धभूमि में फेंके जाने पर अत्यंत सुन्दर लग रही थीं।   |   mahabharat अध्याय 6.87: आठवें दिन व्यूहबद्ध कौरव-पाण्डव-सेनाओंकी रणयात्रा और उनका परस्पर घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 87: आठवें दिन व्यूहबद्ध कौरव-पाण्डव-सेनाओंकी रणयात्रा और उनका परस्पर घमासान युद्ध  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  6.87.30-31h 
निस्त्रिंशाश्च व्यदृश्यन्त विमलाम्बरसंनिभा:।
आर्षभाणि विचित्राणि शतचन्द्राणि भारत॥ ३०॥
अशोभन्त रणे राजन् पात्यमानानि सर्वश:।
 
 
अनुवाद
भरत! आकाश के समान निर्मल तलवारें और सौ चन्द्रमाओं से सुसज्जित बैल की खाल से बनी अनोखी ढालें ​​दिखाई दे रही थीं। हे राजन! वे सभी तलवारें और ढालें ​​युद्धभूमि में फेंके जाने पर अत्यंत सुन्दर लग रही थीं।
 
Bharata! Swords like the clear sky and unique shields made of bull's skin decorated with hundred moon-shaped symbols were visible. O King! All those swords and shields were looking very beautiful when they were thrown on the battlefield. 30 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)