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mahabharat 6.87.19: भीमसेन और सात्यकि के मध्य में अर्थात् उस व्यूह के आगे पुरुषों में श्रेष्ठ श्वेत वाहन अर्जुन खड़े थे, जिनके सारथि साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण थे। मध्य देश में राजा युधिष्ठिर और माद्रीकुमार पाण्डुनन्दन नकुल-सहदेव थे। 19॥   |   mahabharat अध्याय 6.87: आठवें दिन व्यूहबद्ध कौरव-पाण्डव-सेनाओंकी रणयात्रा और उनका परस्पर घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 87: आठवें दिन व्यूहबद्ध कौरव-पाण्डव-सेनाओंकी रणयात्रा और उनका परस्पर घमासान युद्ध  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.87.19 
ताभ्यां बभौ नरश्रेष्ठ: श्वेताश्व: कृष्णसारथि:।
मध्ये युधिष्ठिरो राजा माद्रीपुत्रौ च पाण्डवौ॥ १९॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन और सात्यकि के मध्य में अर्थात् उस व्यूह के आगे पुरुषों में श्रेष्ठ श्वेत वाहन अर्जुन खड़े थे, जिनके सारथि साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण थे। मध्य देश में राजा युधिष्ठिर और माद्रीकुमार पाण्डुनन्दन नकुल-सहदेव थे। 19॥
 
In between Bhimsen and Satyaki, i.e. in the front of that array, stood Arjun, the best white vehicle among men, whose charioteer was Lord Krishna in person. In the middle country, King Yudhishthir and Madrikumar Pandunandan were Nakul-Sahdev. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)