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mahabharat 6.87.14: हे प्रभु! उस सेना में अनेक ध्वजाएँ और श्वेत छत्र थे। नाना रंगों के बहुमूल्य बाजूबंद और धनुष भी उसकी शोभा बढ़ा रहे थे॥14॥   |   mahabharat अध्याय 6.87: आठवें दिन व्यूहबद्ध कौरव-पाण्डव-सेनाओंकी रणयात्रा और उनका परस्पर घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 87: आठवें दिन व्यूहबद्ध कौरव-पाण्डव-सेनाओंकी रणयात्रा और उनका परस्पर घमासान युद्ध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.87.14 
रेजुस्तत्र पताकाश्च श्वेतच्छत्राणि वा विभो।
अंगदान्यत्र चित्राणि महार्हाणि धनूंषि च॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! उस सेना में अनेक ध्वजाएँ और श्वेत छत्र थे। नाना रंगों के बहुमूल्य बाजूबंद और धनुष भी उसकी शोभा बढ़ा रहे थे॥14॥
 
O Lord! Many flags and white umbrellas adorned that army. Precious armlets and bows of various colors adorned it.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)