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mahabharat 6.87.11: हे भरत! त्रिगर्त के पीछे महाबली अश्वत्थामा चल रहा था, जो अपनी गर्जना से सम्पूर्ण पृथ्वी को गुंजायमान कर रहा था।   |   mahabharat अध्याय 6.87: आठवें दिन व्यूहबद्ध कौरव-पाण्डव-सेनाओंकी रणयात्रा और उनका परस्पर घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.87.11 
द्रौणिस्तु रभस: शूरस्त्रैगर्तादनु भारत।
प्रययौ सिंहनादेन नादयानो धरातलम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे भरत! त्रिगर्त के पीछे महाबली अश्वत्थामा चल रहा था, जो अपनी गर्जना से सम्पूर्ण पृथ्वी को गुंजायमान कर रहा था।
 
Bharata! Behind Trigarta walked the mighty warrior Ashwatthama, who was making the entire earth resound with his roar.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)