श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 87: आठवें दिन व्यूहबद्ध कौरव-पाण्डव-सेनाओंकी रणयात्रा और उनका परस्पर घमासान युद्ध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.87.1 
संजय उवाच
परिणाम्य निशां तां तु सुखं प्राप्ता जनेश्वरा:।
कुरव: पाण्डवाश्चैव पुनर्युद्धाय निर्ययु:॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! नरेश्वर, कौरव और पाण्डवों ने निद्रा का सुख भोगकर रात्रि बिताई और पुनः युद्ध के लिए प्रस्थान किया॥1॥
 
Sanjay says- Rajan! Nareshwar, the Kauravas and the Pandavas, after experiencing the bliss of sleep, spent the night and again set out for war. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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