Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.86.8: शान्तनुनन्दन भीष्म ने पलक झपकते ही अलग-अलग बाणों का जाल बिछाकर कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर को अदृश्य कर दिया ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 6.86: भीष्म और युधिष्ठिरका युद्ध, धृष्टद्युम्न और सात्यकिके साथ विन्द और अनुविन्दका संग्राम, द्रोण आदिका पराक्रम और सातवें दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 86: भीष्म और युधिष्ठिरका युद्ध, धृष्टद्युम्न और सात्यकिके साथ विन्द और अनुविन्दका संग्राम, द्रोण आदिका पराक्रम और सातवें दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.86.8 
निमेषार्धेन कौन्तेयं भीष्म: शान्तनवो युधि।
अदृश्यं समरे चक्रे शरजालेन भागश:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
शान्तनुनन्दन भीष्म ने पलक झपकते ही अलग-अलग बाणों का जाल बिछाकर कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर को अदृश्य कर दिया ॥8॥
 
Shantanunandan Bhishma made Kuntinandan Yudhishthira invisible by spreading a net of separate arrows in half a blink of an eye. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)