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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 86: भीष्म और युधिष्ठिरका युद्ध, धृष्टद्युम्न और सात्यकिके साथ विन्द और अनुविन्दका संग्राम, द्रोण आदिका पराक्रम और सातवें दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  6.86.45 
राक्षसाश्च पिशाचाश्च तथान्ये पिशिताशिन:।
समन्ततो व्यदृश्यन्त शतशोऽथ सहस्रश:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
हर जगह सैकड़ों और हजारों की संख्या में राक्षस, पिशाच और अन्य मांसाहारी जानवर दिखाई देने लगे।
 
Everywhere, demons, vampires and other carnivorous animals began to be seen in hundreds and thousands. 45.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)