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mahabharat 6.86.27: तत्पश्चात् उस महासमर में हर्ष और उत्साह से भरे हुए भीष्म को देखकर संजयगण शंखध्वनि के साथ नाना प्रकार से गर्जना करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 6.86: भीष्म और युधिष्ठिरका युद्ध, धृष्टद्युम्न और सात्यकिके साथ विन्द और अनुविन्दका संग्राम, द्रोण आदिका पराक्रम और सातवें दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 86: भीष्म और युधिष्ठिरका युद्ध, धृष्टद्युम्न और सात्यकिके साथ विन्द और अनुविन्दका संग्राम, द्रोण आदिका पराक्रम और सातवें दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.86.27 
सृंजयास्तु ततो दृष्ट्वा हृष्टं भीष्मं महारणे।
सिंहनादांश्च विविधांश्चक्रु: शङ्खविमिश्रितान्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस महासमर में हर्ष और उत्साह से भरे हुए भीष्म को देखकर संजयगण शंखध्वनि के साथ नाना प्रकार से गर्जना करने लगे।
 
Then, seeing Bhishma filled with joy and enthusiasm in that great battle, the Sanjayas began to roar in various ways along with the sound of conches.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)