श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 85: अर्जुनका पराक्रम, पाण्डवोंका भीष्मपर आक्रमण, युधिष्ठिरका शिखण्डीको उपालम्भ और भीमका पुरुषार्थ  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  6.85.40 
आश्चर्यभूतं सुमहत् त्वदीया
दृष्ट्वैव तद् भारत सम्प्रहृष्टा:।
सर्वे विनेदु: सहिता: समन्तात्
पुपूजिरे तव पुत्रस्य शौर्यम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
भरत! इस समय आपके सभी सैनिक चित्रसेन के महान एवं अद्भुत पराक्रम को देखकर अत्यन्त प्रसन्न हुए। वे चारों ओर से आपके पुत्र की वीरता की प्रशंसा और जयजयकार करने लगे।
 
Bharata! At this time all your soldiers were very happy to see the great and wonderful deed of Chitrasena. All of them from all sides started praising and roaring about the bravery of your son. 40.
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि सप्तमयुद्धदिवसे पञ्चाशीतितमोऽध्याय:॥ ८५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें सातवें दिनके युद्धसे सम्बन्ध रखनेवाला पचासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८५॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठके तीन श्लोक मिलाकर कुल ४३ श्लोक हैं।]
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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