Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.85.32-33h: भीमसेन को अचानक हाथ में गदा लिये आते देख जयद्रथ ने यमराज की गदा के समान भयंकर, पाँच सौ तीखे बाणों से उसे चारों ओर से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.85: अर्जुनका पराक्रम, पाण्डवोंका भीष्मपर आक्रमण, युधिष्ठिरका शिखण्डीको उपालम्भ और भीमका पुरुषार्थ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 85: अर्जुनका पराक्रम, पाण्डवोंका भीष्मपर आक्रमण, युधिष्ठिरका शिखण्डीको उपालम्भ और भीमका पुरुषार्थ  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  6.85.32-33h 
तमापतन्तं सहसा जवेन
जयद्रथ: सगदं भीमसेनम्॥ ३२॥
विव्याध घोरैर्यमदण्डकल्पै:
शितै: शरै: पञ्चशतै: समन्तात्।
 
 
अनुवाद
भीमसेन को अचानक हाथ में गदा लिये आते देख जयद्रथ ने यमराज की गदा के समान भयंकर, पाँच सौ तीखे बाणों से उसे चारों ओर से घायल कर दिया।
 
Seeing Bhimasena suddenly approaching with a mace in his hand, Jayadratha pierced him from all sides with five hundred sharp arrows, as dreadful as the mace of Yama.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)