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स चापि दृष्ट्वा समुदीर्यमाण-
मस्त्रं युगान्ताग्निसमप्रकाशम्।
न सम्मुमोह द्रुपदस्य पुत्रो
राजन् महेन्द्रप्रतिमप्रभाव:॥ २८॥
अनुवाद
राजन! प्रलयकाल की अग्नि के समान तेजस्वी उस अस्त्र को देखकर इन्द्र के समान पराक्रमी द्रुपदकुमार शिखण्डी भी भयभीत नहीं हुआ॥28॥
Rajan! Seeing the appearance of that weapon which was as bright as the fire of the doomsday, Drupadakumar Shikhandi, who was as powerful as Lord Indra, did not panic. 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥