श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 85: अर्जुनका पराक्रम, पाण्डवोंका भीष्मपर आक्रमण, युधिष्ठिरका शिखण्डीको उपालम्भ और भीमका पुरुषार्थ  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.85.28 
स चापि दृष्ट्वा समुदीर्यमाण-
मस्त्रं युगान्ताग्निसमप्रकाशम्।
न सम्मुमोह द्रुपदस्य पुत्रो
राजन् महेन्द्रप्रतिमप्रभाव:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
राजन! प्रलयकाल की अग्नि के समान तेजस्वी उस अस्त्र को देखकर इन्द्र के समान पराक्रमी द्रुपदकुमार शिखण्डी भी भयभीत नहीं हुआ॥28॥
 
Rajan! Seeing the appearance of that weapon which was as bright as the fire of the doomsday, Drupadakumar Shikhandi, who was as powerful as Lord Indra, did not panic. 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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