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mahabharat 6.85.26: राजन! धर्मराज के वचनों का एक-एक शब्द कठोर था। उन्होंने उनकी इच्छा के विरुद्ध अनेक बातें कहीं थीं, किन्तु महामनस्वी शिखण्डी ने उन वचनों को अपने लिए आदेश समझकर तुरन्त ही भीष्म को मारने के लिए तैयार हो गया।   |   mahabharat अध्याय 6.85: अर्जुनका पराक्रम, पाण्डवोंका भीष्मपर आक्रमण, युधिष्ठिरका शिखण्डीको उपालम्भ और भीमका पुरुषार्थ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.85.26 
स धर्मराजस्य वचो निशम्य
रूक्षाक्षरं विप्रलापानुबद्धम्।
प्रत्यादेशं मन्यमानो महात्मा
प्रतत्वरे भीष्मवधाय राजन्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
राजन! धर्मराज के वचनों का एक-एक शब्द कठोर था। उन्होंने उनकी इच्छा के विरुद्ध अनेक बातें कहीं थीं, किन्तु महामनस्वी शिखण्डी ने उन वचनों को अपने लिए आदेश समझकर तुरन्त ही भीष्म को मारने के लिए तैयार हो गया।
 
King! Every word of Dharmaraj's words was harsh. He had said many things against his wishes, but on hearing those words, the great-minded Shikhandi considered them as orders for himself and immediately prepared to kill Bhishma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)