Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.85.25: वीर! वीर अर्जुन महायुद्ध में कहीं फँसे हुए हैं। इस समय उनका कोई अता-पता नहीं है। ऐसे समय में जगत् के विख्यात योद्धा होकर भीष्म से आप कैसे भयभीत हो सकते हैं?॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 6.85: अर्जुनका पराक्रम, पाण्डवोंका भीष्मपर आक्रमण, युधिष्ठिरका शिखण्डीको उपालम्भ और भीमका पुरुषार्थ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 85: अर्जुनका पराक्रम, पाण्डवोंका भीष्मपर आक्रमण, युधिष्ठिरका शिखण्डीको उपालम्भ और भीमका पुरुषार्थ  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.85.25 
अज्ञायमाने च धनंजयेऽपि
महाहवे सम्प्रसक्ते नृवीरे।
कथं हि भीष्मात् प्रथित: पृथिव्यां
भयं त्वमद्य प्रकरोषि वीर॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वीर! वीर अर्जुन महायुद्ध में कहीं फँसे हुए हैं। इस समय उनका कोई अता-पता नहीं है। ऐसे समय में जगत् के विख्यात योद्धा होकर भीष्म से आप कैसे भयभीत हो सकते हैं?॥ 25॥
 
Valiant! The valiant Arjun is stuck somewhere in a great war. His whereabouts are not known at this time. In such a time, how can you, being the world's renowned warrior, be afraid of Bhishma?'॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)