अज्ञायमाने च धनंजयेऽपि
महाहवे सम्प्रसक्ते नृवीरे।
कथं हि भीष्मात् प्रथित: पृथिव्यां
भयं त्वमद्य प्रकरोषि वीर॥ २५॥
अनुवाद
वीर! वीर अर्जुन महायुद्ध में कहीं फँसे हुए हैं। इस समय उनका कोई अता-पता नहीं है। ऐसे समय में जगत् के विख्यात योद्धा होकर भीष्म से आप कैसे भयभीत हो सकते हैं?॥ 25॥
Valiant! The valiant Arjun is stuck somewhere in a great war. His whereabouts are not known at this time. In such a time, how can you, being the world's renowned warrior, be afraid of Bhishma?'॥ 25॥