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mahabharat 6.85.22: देखो! जैसे यमराज समय पर आकर क्षण भर में ही मर्त्य को नष्ट कर देते हैं, वैसे ही इस युद्ध में परम पराक्रमी भीष्म अपने अत्यन्त वेगवान बाणों द्वारा मेरी सम्पूर्ण सेना को बड़ा कष्ट दे रहे हैं॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 6.85: अर्जुनका पराक्रम, पाण्डवोंका भीष्मपर आक्रमण, युधिष्ठिरका शिखण्डीको उपालम्भ और भीमका पुरुषार्थ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 85: अर्जुनका पराक्रम, पाण्डवोंका भीष्मपर आक्रमण, युधिष्ठिरका शिखण्डीको उपालम्भ और भीमका पुरुषार्थ  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.85.22 
प्रेक्षस्व भीष्मं युधि भीमवेगं
सर्वांस्तपन्तं मम सैन्यसंघान्।
शरौघजालैरतितिग्मवेगै:
कालं यथा कालकृतं क्षणेन॥ २२॥
 
 
अनुवाद
देखो! जैसे यमराज समय पर आकर क्षण भर में ही मर्त्य को नष्ट कर देते हैं, वैसे ही इस युद्ध में परम पराक्रमी भीष्म अपने अत्यन्त वेगवान बाणों द्वारा मेरी सम्पूर्ण सेना को बड़ा कष्ट दे रहे हैं॥ 22॥
 
Look! Just as Yamaraja arrives at the right time and destroys the mortal in a moment, similarly, in this war, Bhishma, who is extremely powerful, is causing so much trouble to my entire army with his extremely fast arrows.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)