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mahabharat 6.85.19: जब शान्तनुपुत्र भीष्म ने शिखण्डी का धनुष काट डाला, तब युद्धस्थल में महाबली युधिष्ठिर, जो बेताज बादशाह थे, शिखण्डी की ओर देखकर कुपित हो उठे और क्रोधपूर्वक उससे इस प्रकार बोले-॥19॥   |   mahabharat अध्याय 6.85: अर्जुनका पराक्रम, पाण्डवोंका भीष्मपर आक्रमण, युधिष्ठिरका शिखण्डीको उपालम्भ और भीमका पुरुषार्थ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 85: अर्जुनका पराक्रम, पाण्डवोंका भीष्मपर आक्रमण, युधिष्ठिरका शिखण्डीको उपालम्भ और भीमका पुरुषार्थ  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.85.19 
छिन्नायुधं शान्तनवेन राजा
शिखण्डिनं प्रेक्ष्य च जातकोप:।
अजातशत्रु: समरे महात्मा
शिखण्डिनं क्रुद्ध उवाच वाक्यम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जब शान्तनुपुत्र भीष्म ने शिखण्डी का धनुष काट डाला, तब युद्धस्थल में महाबली युधिष्ठिर, जो बेताज बादशाह थे, शिखण्डी की ओर देखकर कुपित हो उठे और क्रोधपूर्वक उससे इस प्रकार बोले-॥19॥
 
When Shantanu's son Bhishma cut off Shikhandi's bow, then in the battlefield, the great Yudhishthira, who was the uncrowned king, became infuriated looking at Shikhandi and spoke to him angrily as follows -॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)