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mahabharat 6.85.15: यद्यपि महारथियों में श्रेष्ठ पाण्डव सब लोग एकत्र होकर वहाँ पहुँच गए थे, तथापि उनके साथ विचित्र युद्ध करने वाले गंगापुत्र शान्तनुनन्दन महात्मा भीष्म को कोई पीड़ा नहीं हुई॥15॥   |   mahabharat अध्याय 6.85: अर्जुनका पराक्रम, पाण्डवोंका भीष्मपर आक्रमण, युधिष्ठिरका शिखण्डीको उपालम्भ और भीमका पुरुषार्थ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 85: अर्जुनका पराक्रम, पाण्डवोंका भीष्मपर आक्रमण, युधिष्ठिरका शिखण्डीको उपालम्भ और भीमका पुरुषार्थ  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.85.15 
तै: सम्प्रयुक्तै: स महारथाग्रॺै-
र्गङ्गासुत: समरे चित्रयोधी।
न विव्यथे शान्तनवो महात्मा
समागतै: पाण्डुसुतै: समस्तै:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि महारथियों में श्रेष्ठ पाण्डव सब लोग एकत्र होकर वहाँ पहुँच गए थे, तथापि उनके साथ विचित्र युद्ध करने वाले गंगापुत्र शान्तनुनन्दन महात्मा भीष्म को कोई पीड़ा नहीं हुई॥15॥
 
Even though all the Pandavas, the best among the great charioteers, had gathered together and reached there, Shantanunandan Mahatma Bhishma, the son of Ganga, who fought a strange battle with them, did not feel pain. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)