| श्री महाभारत » पर्व 6: भीष्म पर्व » अध्याय 85: अर्जुनका पराक्रम, पाण्डवोंका भीष्मपर आक्रमण, युधिष्ठिरका शिखण्डीको उपालम्भ और भीमका पुरुषार्थ » श्लोक 1 |
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| | | | श्लोक 6.85.1  | संजय उवाच
स ताड्यमानस्तु शरैर्धनंजय:
पदा हतो नाग इव श्वसन् बली।
बाणेन बाणेन महारथानां
चिच्छेद चापानि रणे प्रसह्य॥ १॥ | | | | | | अनुवाद | | संजय कहते हैं- राजन! इस प्रकार शत्रुओं के बाणों से पीड़ित होकर महाबली अर्जुन क्रोध से आहें भरने लगे, मानो पैर से कुचले हुए सर्प हों। उन्होंने एक-एक बाण चलाकर युद्ध में उपस्थित समस्त महारथियों के धनुष काट डाले। | | | | Sanjay says- Rajan! Thus, being hurt by the arrows of the enemies, the mighty Arjun started sighing in anger like a snake crushed by his foot. He forcefully shot individual arrows and cut off the bows of all the great warriors in the battle. 1॥ | | ✨ ai-generated | | |
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