श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ  »  श्लोक 51-52
 
 
श्लोक  6.84.51-52 
एवं संजल्पतस्तस्य बीभत्सो: शत्रुघातिन:॥ ५१॥
श्रुत्वापि परुषं वाक्यं सुशर्मा रथयूथप:।
न चैनमब्रवीत् किंचिच्छुभं वा यदि वाशुभम्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर शत्रुसंहारक अर्जुन के पुरुषार्थपूर्ण वचन सुनकर भी सारथि सुशर्मा ने उसे भला-बुरा कुछ नहीं कहा ॥51-52॥
 
Saying this, even after hearing the manly words of the enemy-slayer Arjun, charioteer Susarma did not say anything good or bad to him. ॥ 51-52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)