चोदयाश्वान् हृषीकेश यत्रैते बहुला रथा:॥ ४५॥
एते हि बहव: शूरा: कृतास्त्रा युद्धदुर्मदा:।
यथा हन्युर्न न: सेनां तथा माधव चोदय॥ ४६॥
अनुवाद
हृषीकेश! अपने घोड़ों को उसी दिशा में हाँकें जहाँ ये अनेक रथ जा रहे हैं। माधव! इस रथ को इस प्रकार ले चलो कि ये शस्त्रविद्या के विशेषज्ञ और युद्ध में वीरतापूर्वक लड़ने वाले असंख्य योद्धा हमारी सेना का नाश न कर सकें।॥45-46॥
Hrishikesha! Drive your horses in the direction where these many chariots are going. Madhava! Take this chariot in the same way that these experts in the art of weapons and numerous warriors who are brave in battle cannot destroy our army.'॥ 45-46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥