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mahabharat 6.84.41: हे मनुष्यों! तत्पश्चात् अभिमन्यु का उसके साथ घोर युद्ध आरम्भ हो गया, जैसे शरीर के तीन महाभूतों - वात, पित्त और कफ - में युद्ध होता है ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 6.84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.84.41 
अभिमन्योस्ततस्तैस्तु घोरं युद्धमवर्तत।
शरीरस्य यथा राजन् वातपित्तकफैस्त्रिभि:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों! तत्पश्चात् अभिमन्यु का उसके साथ घोर युद्ध आरम्भ हो गया, जैसे शरीर के तीन महाभूतों - वात, पित्त और कफ - में युद्ध होता है ॥ 41॥
 
O lord of men! Then began Abhimanyu's fierce battle with him, just as a battle takes place between the three elements of the body - Vata, Pitta and Kapha. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)