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mahabharat 6.84.35: उधर, क्रोध में भरे हुए महाबली धृष्टकेतु ने शीघ्रतापूर्वक भूरिश्रवा की छाती पर नब्बे बाण मारे।   |   mahabharat अध्याय 6.84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.84.35 
सौमदत्तिं तथा क्रुद्धो धृष्टकेतुर्महाबल:।
नवत्या सायकै: क्षिप्रं राजन् विव्याध वक्षसि॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
उधर, क्रोध में भरे हुए महाबली धृष्टकेतु ने शीघ्रतापूर्वक भूरिश्रवा की छाती पर नब्बे बाण मारे।
 
On the other hand, the mighty Dhrishtaketu, filled with anger, quickly struck Bhurishrava's chest with ninety arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)