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mahabharat 6.84.27: उस विशाल शुद्ध लोहे की बनी हुई गदा को अपनी ओर आते देख कृपाचार्य ने हजारों बाणों से उसे गिरा दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.84.27 
तामापतन्तीं विमलामश्मगर्भां महागदाम्।
शरैरनेकसाहस्रैर्वारयामास गौतम:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उस विशाल शुद्ध लोहे की बनी हुई गदा को अपनी ओर आते देख कृपाचार्य ने हजारों बाणों से उसे गिरा दिया।
 
Seeing that huge mace made of pure iron coming towards him, Krupacharya knocked it away with thousands of arrows. 27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)