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mahabharat 6.84.26: तब क्रोध में भरे हुए चेकितान ने कृपाचार्य को मारने की इच्छा से पुनः उन पर गदा से आक्रमण किया, जैसे इन्द्र वृत्रासुर पर आक्रमण करता है॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 6.84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.84.26 
चेकितानस्तत: क्रुद्ध: पुनश्चिक्षेप तां गदाम्।
गौतमस्य वधाकाङ्क्षी वृत्रस्येव पुरंदर:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तब क्रोध में भरे हुए चेकितान ने कृपाचार्य को मारने की इच्छा से पुनः उन पर गदा से आक्रमण किया, जैसे इन्द्र वृत्रासुर पर आक्रमण करता है॥ 26॥
 
Then Chekitana, filled with anger, wishing to kill Krupacharya, again attacked him with his mace, just as Indra attacks Vritrasura.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)