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mahabharat 6.84.25: तब कृपाचार्य ने भूमि पर खड़े होकर चेकितान पर सोलह बाण छोड़े, जो चेकितान को छेदते हुए भूमि में धंस गए।   |   mahabharat अध्याय 6.84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.84.25 
भूमिष्ठो गौतमस्तस्य शरांश्चिक्षेप षोडश।
शरास्ते सात्वतं भित्त्वा प्राविशन् धरणीतलम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तब कृपाचार्य ने भूमि पर खड़े होकर चेकितान पर सोलह बाण छोड़े, जो चेकितान को छेदते हुए भूमि में धंस गए।
 
Then Krupacharya stood on the ground and shot sixteen arrows at Chekitan. Those arrows pierced Chekitan and went into the ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)