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mahabharat 6.84.17: रथ के घोड़ों को मारा गया देखकर तथा युद्ध में राजा युधिष्ठिर का प्रयत्न देखकर श्रुतायु उस समय रथ छोड़कर बड़े वेग से भाग गया ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 6.84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.84.17 
हताश्वं तु रथं त्यक्त्वा दृष्ट्वा राज्ञोऽस्य पौरुषम्।
विप्रदुद्राव वेगेन श्रुतायु: समरे तदा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
रथ के घोड़ों को मारा गया देखकर तथा युद्ध में राजा युधिष्ठिर का प्रयत्न देखकर श्रुतायु उस समय रथ छोड़कर बड़े वेग से भाग गया ॥17॥
 
Seeing that the horses of the chariot were killed and also observing the efforts of King Yudhishthira in the war, Shrutayu at that time abandoned the chariot and fled with great speed. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)