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mahabharat 6.84.12: क्रोध से भरकर उसने अपने चेहरे के कोनों को चाटा और अपने शरीर को प्रलय के समय के सूर्य के समान भयानक बना लिया।   |   mahabharat अध्याय 6.84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.84.12 
स च क्रोधसमाविष्ट: सृक्किणी परिसंलिहन्।
दधारात्मवपुर्घोरं युगान्तादित्यसंनिभम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
क्रोध से भरकर उसने अपने चेहरे के कोनों को चाटा और अपने शरीर को प्रलय के समय के सूर्य के समान भयानक बना लिया।
 
Filled with anger, he licked the corners of his face and made his body as terrifying as the Sun at the time of doomsday.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)