श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 83: इरावान‍्के द्वारा विन्द और अनुविन्दकी पराजय, भगदत्तसे घटोत्कचका हारना तथा मद्रराजपर नकुल और सहदेवकी विजय  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.83.9 
आत्मदोषात् समुत्पन्नं शोचितुं नार्हसे नृप।
न हि रक्षन्ति राजान: सर्वथात्रापि जीवितम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! अपने पापों के कारण जो कष्ट तुम्हें हुआ है, उसके लिए तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए। (अपने पापों के कारण) इस पृथ्वी पर राजा भी अपने प्राणों की पूर्ण रक्षा नहीं कर पाते।॥9॥
 
O lord of men! You should not grieve for the trouble that you have faced due to your own sins. (Due to your sins) Even kings are not able to completely protect their lives on this earth.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)