श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 83: इरावान‍्के द्वारा विन्द और अनुविन्दकी पराजय, भगदत्तसे घटोत्कचका हारना तथा मद्रराजपर नकुल और सहदेवकी विजय  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  6.83.57 
अभिदुद्रुवतुर्हृष्टौ तव सैन्यं विशाम्पते।
यथा दैत्यचमूं राजन्निन्द्रोपेन्द्राविवामरौ॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! जैसे भगवान इन्द्र और भगवान उपेन्द्र दैत्यों की सेना को भगा देते हैं, उसी प्रकार नकुल और सहदेव हर्ष में भरकर आपकी सेना को भगाने लगे।
 
Prajanath! Just as Lord Indra and Lord Upendra drive away the army of demons, in the same way Nakul and Sahadeva filled with joy started driving away your army. 57.
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि द्वन्द्वयुद्धे त्र्यशीतितमोऽध्याय:॥ ८३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें द्वन्द्वयुद्धविषयक तिरासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८३॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ५८ १/२ श्लोक हैं।]
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)