vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 83: इरावान्के द्वारा विन्द और अनुविन्दकी पराजय, भगदत्तसे घटोत्कचका हारना तथा मद्रराजपर नकुल और सहदेवकी विजय
»
श्लोक 53
श्लोक
6.83.53
स गाढविद्धो व्यथितो रथोपस्थे महारथ:।
निषसाद महाराज कश्मलं च जगाम ह॥ ५३॥
अनुवाद
महाराज! उस भयंकर आघात से पीड़ित और व्यथित होकर महारथी शल्य रथ के पिछले भाग में बैठ गए और मूर्छित होकर गिर पड़े॥53॥
Maharaj! Pained and distressed by the severe blow, the great warrior Shalya sat in the rear part of the chariot and fell unconscious. ॥ 53॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×